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Pandit Deendayal Upadhyaya Ka Rashtrachintan

Price range: ₹49.00 through ₹700.00

Book Publication Details
Author Dr. Rameshwar Mishra, Dr. Atul Gupta (Editors)
ISBN 978-93-47652-59-2 (Print Edition)
e-ISBN 978-93-47652-60-8 (Digital Edition)
DOI
https://doi.org/10.5281/zenodo.21706864
Total Pages 195
Publication Date July 2026
Publisher Cogniverse Press, Jorhat, Assam, India
SKU: N/A Category:

Description

Pandit Deendayal Upadhyaya Ka Rashtrachintan
Book Details

Title: पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राष्ट्रचिंतन (Pandit Deendayal Upadhyaya Ka Rashtrachintan)

Editors: Dr. Rameshwar Mishra (HoD, Institute of Arts & Humanities, SAGE University, Indore, Madhya Pradesh, India) and Dr. Atul Gupta (Principal, Govt. College Sahrai, Ashoknagar, Madhya Pradesh, India)

Publisher: Cogniverse Press, Nakari Gaon, Borigaon Siding, Jorhat, Assam, India

Edition: First Edition, July 2026

ISBN (Print): 978-93-47652-59-2

e-ISBN: 978-93-47652-60-8

DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.21706864

Preface

‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राष्ट्रचिंतन’ एक शोधपरक संपादित ग्रंथ है, जिसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्रवादी, सांस्कृतिक, दार्शनिक एवं सामाजिक चिंतन का समकालीन संदर्भों में विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में कुल 13 अध्याय हैं, जिनमें विभिन्न विद्वानों ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, एकात्म मानववाद, धर्म एवं राजनीति, राष्ट्रीय शिक्षा, भारतीय ज्ञान परम्परा, युवा शक्ति तथा विकसित भारत के निर्माण में दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता का बहुआयामी अध्ययन किया है।

इस पुस्तक में राष्ट्र-निर्माण, सांस्कृतिक अस्मिता, मूल्यपरक शिक्षा, सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, सुशासन तथा विकसित भारत–2047 जैसे विषयों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक अध्याय भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और लोककल्याण की दृष्टि से उपाध्याय जी के चिंतन का पुनर्पाठ करता है तथा उनके विचारों की वर्तमान राष्ट्रीय एवं वैश्विक संदर्भों में उपयोगिता को रेखांकित करता है।

संपादित स्वरूप के कारण पुस्तक में विभिन्न विद्वानों के स्वतंत्र दृष्टिकोणों का समन्वय है, जिससे इसकी अकादमिक गुणवत्ता, शोधपरकता एवं विषय-विस्तार समृद्ध हुआ है। यह ग्रंथ भारतीय राजनीतिक चिंतन, संस्कृति, दर्शन, शिक्षा, इतिहास, लोकनीति तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्येताओं, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं नीति-निर्माताओं के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ के रूप में तैयार किया गया है।

Key Themes
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राष्ट्रचिंतन
  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
  • एकात्म मानववाद
  • धर्म और राजनीति
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति
  • भारतीय ज्ञान परम्परा
  • युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण
  • सामाजिक समरसता एवं नैतिक मूल्य
  • आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत 2047
  • सुशासन एवं लोककल्याण
Table of Contents
Chapter 1: The Role of Cultural Nationalism in Nation-Building: A Study with Special Reference to Pandit Deendayal Upadhyaya

Author: Ruchir Mishra

Chapter 2: Cultural Nationalism in the Digital Age in India: Relevance, Challenges, and Future Possibilities

Authors: Dr. Rakesh Kumar, Dr. Rameshwar Mishra

Chapter 3: Dharma and Politics: Reinterpreting Deen Dayal Upadhyay’s Cultural Philosophy in the Indian Democratic Framework

Author: Ms. Nupur Bishnoi

Chapter 4: New Education Policy and Cultural Nationalism: Revisiting the Vision of Pandit Deendayal Upadhyaya

Author: Ms. Vanshita Singh

Chapter 5: पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और युवाओं की भूमिका: एक अध्ययन

Authors: अतुल गुप्ता, डॉ. ओमजय गायकवाड़

Chapter 6: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विकसित भारत 2047 : सभ्यतागत चेतना से समग्र विकास-दृष्टि तक का वैचारिक एवं नीतिगत अनुशीलन

Author: डॉ. प्रभाकर पाण्डेय

Chapter 7: एकात्म मानववाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अंतर्संबंध

Author: डॉ. नीरज कुमार पाण्डेय

Chapter 8: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विकसित भारत 2047: वैचारिक समन्वय और भविष्य की रूपरेखा

Authors: डॉ. दीपक जहागीरदार, डॉ. पद्मश्री शर्मा

Chapter 9: पंडित दीनदयाल उपाध्याय का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: अवधारणा और स्वरूप

Author: डॉ. पुष्पलता

Chapter 10: कैनवास पर राष्ट्र निर्माणः एकात्म मानववाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की कलात्मक अभिव्यक्ति

Author: डॉ. रघुवीर

Chapter 11: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विकसित भारत 2047: भारतीय ज्ञान परम्परा के परिप्रेक्ष्य में एक अध्ययन

Authors: उज्जवल भाटी, प्रांजल भावसार

Chapter 12: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और दीनदयाल उपाध्याय की वर्तमान प्रासंगिकता

Authors: सार्थक पाटीदार, नंदिनी दाणे

Chapter 13: डिजिटल युग में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चुनौतियाँ और संभावनाएँ

Author: मीनाक्षी कुमारी

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